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Saturday, December 31, 2016

यादों मे तस्वीर मेरी

जुड़ जाऊँगा तुझ से तेरी तक़दीर बन कर
रहुँगा मोहब्बत का मुन्तज़िर बन कर
न सोचना कि गुज़रा वक़्त हुं मैं भूल जाओगे
यादें भी आएँगी मेरी तस्वीर बन कर

Saturday, December 17, 2016

नज़रअंदाज़ी

मैं हर मंज़र मे तलाशता हुं मौजूदगी जिनकी
वो देख कर भी अक़्सर मुझे अनदेखा कर देते हैं

Sunday, November 27, 2016

दुनियादारी

लोग मशरूफ हैं बडे दुनियादारी मे जुल्फी
अब न वक्त मिलता है मिलने मिलाने के लिये

Saturday, November 26, 2016

मुस्कुराते चेहरे

देखे हैं कई चेहरे मुस्कुराते हुए
कुछ हंसते हुए तो कुछ अपना दर्द छुपाते हुए

Tuesday, November 22, 2016

हिसाब ए ईश्क़

दिल लगा के दिल के सौदागर से ईश्क़ का मुनाफा हरजाना सिख लिया
निकले थे राह ए दिल पे बेघर हो कर अब हर दिल मे ठिकाना बनाना सिख लिया
केहते थे वो कि दर्द ए दिल मे अस्क़ तेरे बेह जाएंगे जुल्फी
बदौलत उनकी हम ने हर दर्द मे मुस्कुराना सिख लिया

Tuesday, November 8, 2016

तेरा प्यार

बेहती इन आँखों का इन्तेज़ार ज़रूरी है
दिल पे धड़क़नों का ऐतबार ज़रूरी है
जी लेंगे तुझ से दूर हो कर भी ऐ सनम
हर धड़क़न में बस तेरा प्यार ज़रूरी है

Friday, November 4, 2016

दिल ए राबता

दिल से दिल जुडे कि हाल पढ लेते हैं
वो दूर से ही हमारे ख़याल पढ लेते हैं

Thursday, October 27, 2016

बेवफ़ाई का समन्दर

न क़स्ती थी न किनारा था
न साथ किसी अपने का सहारा था
डूब रहे थे हम जिसमे ऐ जुल्फी
वो समन्दर ही दरअसल हमारा था

Monday, October 24, 2016

बदलाव

जूनून ए इश्क़ मे मेरे कभी बदलाव न होता
ग़र दिल पे मेरे बेवफ़ाई का वो घाव न होता

Saturday, October 15, 2016

दर्द ए ग़ज़ल

लिख दूँ कोई ग़ज़ल कि दर्द ए दिल बयां कर दूँ
अंदाज़ ए शायरी में हर मुश्क़िल बयां कर दूँ
छिपाउँ किस तरहा क़िस्से तेरी बेवफ़ाई के
कि तुझे भी हर हर्फ़ मे शामिल बयां कर दूँ

Tuesday, October 11, 2016

ज़िक्र ए बेवफ़ाई

हो रही थी ज़िक्र ए बेवफ़ाई मेहफ़िल में
वो लफ़्ज़ों मे बयां करते रहे और हम अस्क़ों में

Saturday, October 8, 2016

उम्मीद ए मोहब्बत

केहते हैं कि मिलता है खुदा मोहब्बत करने वालों में
हमैं तो मोहब्बत भी न मिली हम पे मरने वालों में

Monday, September 19, 2016

नज़ारे की तलब

नज़ारा ए चाँद की तलब है ज़माने से ऐ जुल्फी
निकलते हैं घर से हर वक़्त वो पर्दे की आड़ में

Saturday, September 3, 2016

साथ

पाने को साथ हर मोड़ पर ठहर जाएगा
अक़्स मेरा तेरी यादों मे उतर जाएगा
नही रहेगा तु ख़ाली ख़ुद के लिये भी
मेरा है तु मुझ ही से भर जाएगा

Sunday, August 14, 2016

चमक चाँद सी

रौशन चाँद सा चेहरा है उसका ऐ जुल्फीकार
कहीं चमक खूबसूरती की तो कहीं दाग बेवफ़ाई के

Monday, July 18, 2016

रोता आसमां

आज ग़म किस बात का है ऐ आसमान तुझे
जो तु भी बरस रहा है मेरी आंखों की तरह

Monday, June 13, 2016

क़ुसूर ए बेवफ़ाई

ग़ुमनामी के मंज़र थे अब तक आज हम मशहूर हो गए
कि हम से कुछ खफ़ा खफ़ा हमारे दस्तूर हो गए
करती रही वो ज़ालिम हम से बेवफ़ाई हर पल
वो लम्हे बेवफ़ाईयत के जुल्फीकार सारे हमारे क़ुसूर हो गए

Thursday, June 9, 2016

जलते गवाह

कुछ युं समेटा उसने बेवफ़ाई की दास्तान को
कि लिख दिया मेरे नाम इश्क़ के हर अंजाम को
डर था उसे कि कोई गवाह न हो जाए बेवफ़ाई का उसकी
उसने हर वो ख़त जला दिये मेरे कल शाम को

Sunday, June 5, 2016

काम से बदनामी तक

वो अपने काम हमारे नाम कर गए
कि हमे बेवफ़ा बता कर बदनाम कर गए

Saturday, May 21, 2016

रेत में सूरत तेरी

फिराईं जो ऊँगलियां कभी रेत पर हम ने तो वहाँ तुम्हारी सूरत बन गइ
कुछ युं बसाया तुम्हे दिल मे अपने कि तुम हर धड़कन की ज़रूरत बन गइ

Thursday, May 12, 2016

ख़त्म से शुरुआत

जहाँ ख़त्म होता हुं मैं वहाँ से तुम्हारी शुरुआत होती है
नही गुज़रता दिन तुम्हारे बिना न तुम बिन मेरी रात होती है
अब तो ख़ामोश नही रेहता दिल मेरा खामोशियों में ऐ सनम
कि मेहफ़िल ऐ तन्हाई मे भी हर पल तुम्हारी बात होती है

Sunday, May 8, 2016

जलते दिल से रौशन ज़िंदगी

हर अस्क़ तेरा अपनी आंखों से बहा दुँगा
हर शाम तेरी सितारों से सज़ा दुँगा
न होने दुँगा कभी अन्धेरा तेरी ज़िंदगी में
रौशन करने को तेरी ज़िंदगी मैं अपना दिल भी जला दुँगा

Sunday, April 24, 2016

मेरी धड़कनों का फासला तुझे खलता है,
शायद तभी तु मेरी धड़कनों के बीच बसता है.

Saturday, April 23, 2016

क़िस्सा नही थी और न कोई कहानी थी वो,
जुल्फ़ीकार की दास्तान ए ज़िन्दग़ानी थी वो.

Thursday, April 21, 2016

कल तक जो अपने थे आज बेग़ाने हो गए,
अब अल्फाज़ भी मेरे सर दर्द के बहाने हो गए.

Wednesday, April 20, 2016

हुस्न सँग ए मरमर से तराश भेजा है,
लगता है खुदा ने हमारे लिये कुछ खाश भेजा है.

Friday, April 15, 2016

अपनी मोहब्बत को वो मेरी जान समझ लेते हैं,
मेरे हर दर्द को वो मेरा इम्तिहान समझ लेते हैं.

Thursday, April 14, 2016

पा के भी उसको शायद पाया नही हम ने,
दिल्लगी का एहसान जताया नही हम ने,
कुछ युं झुठलादी मोहब्बत उसने हमारी,
कि वादा इश्क़ का कभी निभाया नही हम ने.

Monday, April 4, 2016

आंखें हैं उसकी या सैलाब मोहब्बत का कोई,
हर नज़र के साथ भीग जाता हुं मैं.

Sunday, April 3, 2016

फना हो कर भी इश्क़ मे उसके दिल्लगी का माईना हो जाऊँगा,
दिखेगी जिसमे मोहब्बत जुल्फ़ीकार इश्क़ का मैं वो आईना हो जाऊँगा.

Monday, March 28, 2016

दिल छोटा सा था मेरा और चाहने वाले कुछ ज़्यादा,
शायद यही वजह रही होगी मेरे दिल के टूट जाने की.

Thursday, March 24, 2016

रहूँगा मौजूद तेरी बातों मे,
याद आऊँगा ज़रूर तन्हा रातों मे,
भीगेंगी जब कभी पलकें तेरी,
बरस जाऊँगा मैं भी बरसातों मे.

Sunday, March 20, 2016

तुझे पा कर ऐ सनम दिल्लग़ी पा ली हम ने,
इश्क़ की शक़्ल मे तेरी बन्दग़ी पा ली हम ने,
जीना बेमाइने सा था अब तक शायद जुल्फ़ीकार का,
आज लगता है कि तुझ मे ज़िंदग़ी पा ली हम ने.

Friday, March 18, 2016

कइ सवाल थे मेरी तन्हाई के तुझ से ऐ बेवफ़ा,
कुछ खामोश रेह गए और कुछ अस्क़ों मे बेह गए.

Tuesday, March 8, 2016


इन खुश्बूओं मे कभी तेरा एहसास ढूँढा करते थे,
भीड़ की हर शक़्ल मे हम कोई खाश ढूँढा करते थे.
जो रब दिखता है इश्क़ वालों को अपने यार की शक़्ल मे,
हम तेरे इश्क़ मे उस को हो के बदहवाश ढूँढा करते थे.
तुझे देख कर ही तो हर पल दिल धड़कता था हमारा,
हम तो तुझ मे हर धड़कन हर साँस ढूँढा करते थे.
जुदा हुआ भी तु कुछ इस क़दर कि फिर मिल न पाया हमे,
हरदम तुझे हम अपने दिल के पास ढूँढा करते थे.
वो जो वादे किये थे तुने आया नही फिर निभाने कि खातिर,
जो पुरी की हो कभी हमारी हम वो आस ढूँढा करते थे.
तेरी मोहब्बत भरी बातों मे कोई सच्चाई तो होगी ऐ ज़ालिम,
हम तेरे हर झूठ को बारिक़ी से तराश ढूँढा करते थे.

Friday, March 4, 2016

मोहब्बत की राहों मे चलते चलते काँटों का आशियाना मिला,
हम समझते रहे जिसे अपना दरअसल वही बेगाना मिला.
हम ने अपना दिल दिया था उसे इस क़दर ऐतबार था उस पर,
उम्मीद ए वफ़ा थी जिस से उसी से दर्द का फ़साना मिला.
वो झूठे वादे थे जिसके मोहब्बत दिखावे की थी,
उस बेवफ़ा सनम का तो किसी और के साथ याराना मिला.
न कुछ पाना था और न इश्क़ से ज़्यादा कुछ चाहते थे,
माँगा जो इश्क़ तो बदले मे बेवफ़ाई का नज़राना मिला.
ढूँढते थे हम जिस मुजरिम को दुनिया की भीड़ मे,
उस क़ातिल ए इश्क़ का हमारी निगाहों मे ही ठिकाना मिला.
वो लाख कर ले कोशिश मगर हमे भूला न पाएगा,
याद रहेगा उसे कि बेन्तेहा चाहने वाला एक दीवाना मिला.

Sunday, February 28, 2016

हर वो याद के साथ तेरी आंखों को भर जाऊँगा,
दिल मे तेरे कहीं धड़कन बनकर ठहर जाऊँगा,
भूलने न दूँगा तुझे हर क़िस्सा वो दोस्ती का ऐ दोस्त,
दोस्त हुं मैं कोई याद नही जो ज़हन से उतर जाऊँगा.

Saturday, February 27, 2016

हर दर्द की इन्तहा से गुज़र चुका हुं मैं,
दलदल ए बेवफाई मे उतर चुका हुं मैं,
केहते हैं लोग कि खाली नही दिल मेरा मोहब्बत के लिये,
वो क्या जाने कि कितने ज़ख्मों से भर चुका हुं मैं.

Friday, February 26, 2016


किनारों से तो हर समन्दर खुशनुमा नज़र आता है,
गेहराईओं मे छिपे राज़ कौन जान पाता है.
बेफिक़री से जीते हैं वो जिन्हे मोहब्बत नही किसी से,
गैरों से दिल लगाने वाला ही अक़्सर चोट खाता है.
कोई लिखता है खत जज़्बातों वाले किसी की यादों मे खो कर,
कोई किसी के खत को सिर्फ क़ागज़ समझ के जलाता है.
किसी की वफ़ा है कि भूलने नही देती उसके प्यार को,
कोई बेवफाईयत मे डूब कर अपने प्यार को भूलाता है.
कोई देख नही पाता अपने यार की आंख मे क़तरा आँसु का,
कोई बडी ही बेदर्दी से अपने यार को रुलाता है.
जब देखता हुं किसी इश्क़ वाले को रोते अपने रब की खातिर,
तब सोचता हुं क्युँ कोई किसी को अपना रब बनाता है.

Tuesday, February 23, 2016

वो आए मेहफिल मे तो इश्क़ का बहाना हो गया,
उनका मेरी निगाहों मे ही कहीं ठिकाना हो गया.
संजिदगी छाई हुई थी मेहफिल ए दिल मे अब तक,
उनके आते ही हर लफ्ज़ शायराना हो गया.
हुस्न की मलिका हैं वो उनकी नज़ाक़त तो देखो,
उनकी इक हसी से सारा आलम आशिक़ाना हो गया.
उन्हो ने देखा जो मुझे युं नज़रें उठा कर,
मेरे दिल पे जैसे वार कोई क़ातिलाना हो गया.
मेरे सीने मे जो दिल धड़क रहा है बार बार,
अब वो भी मेरा न रहा बेगाना हो गया.
अब नही हैं लफ्ज़ मेरे पास उनकी तारीफ़ की खातिर,
ऐ जुल्फ़ीकार मेरा तो हर शेर उनका दीवाना हो गया.
मैं लिखता चला गया याद मे उनकी कुछ इस क़दर,
कि मुझे मालूम ही नही कब ये एक फ़साना हो गया.
कोई बताए उन्हे हमारे दिल मे जो शोर ए मोहब्बत उठा है,
उन्हे शायद मालूम नही कि हमे खामोश रहे ज़माना हो गया.
वो एक मुलाक़ात अधूरी ही रेह गई न चाहते हुए भी,
अब हररोज़ उनका मेरे दिल मे आना जाना हो गया.

Wednesday, February 17, 2016


एक खेल बन के रेह गया हुं मैं ऐ जुल्फ़ीकार,
कभी ज़िंदगी खेल जाती है तो कभी लोग.

Sunday, February 14, 2016


उलझ के रेह गया हुं दिल के टुकडों मे मैं,
समझ नही आ रहा दिल टूटा है या तोडा गया है.

Saturday, February 13, 2016

मोहब्बत मे दर्द ए दिल का सेह जाना ही सही है,
तेरी याद मे अस्क़ों का बेह जाना ही सही है,
तु ही तु बसी थी अब तक मुझ मे ऐ बेवफ़ा,
मुझ मे अब मेरा कुछ रेह जाना ही सही है.

Friday, February 12, 2016


क्या बहाऊँ मैं अस्क़ों को तेरी याद मे ऐ ज़ालिम,
अस्क़ हैं कि तेरी यादों से वफ़ा कर बैठे हैं.

Sunday, January 31, 2016

दिल के बैकडोर से तुने हमे ही हैक कर दिया,
आंखों ही आंखों मे दिल का पासवर्ड़ भी क्रैक कर दिया,
देखते ही देखते मेमरी भी ब्लोक हो गई हमारी,
ऐसा वाईरस डाला इश्क़ का कि पुरा सिस्टम ही ब्रेक कर दिया.

Thursday, January 28, 2016

किये वादे तो बहुत से पर निभाये नही है,
जो चल दिये छोड़ कर वो वापस आए नही है.

Wednesday, January 27, 2016

यादों का सिलसिला चलता रहेगा,
हर कोई अंदाज़ ए इश्क़ मे ढलता रहेगा,
हम न बदलेंगे अपना हाल ऐ ज़ालिम,
चाहे तु अपने तेवर बदलता रहेगा.

Tuesday, January 26, 2016

मुस्कुराहट को मेरी वो तरस जाएँगे,
दलदल ए इश्क़ मे ही कहीं धस जाएँगे,
यादों का तो कुछ युं होगा सिलसिला,
कि उनकी आंखों से आँसु बरस जाएँगे.

Monday, January 25, 2016


इश्क़ की बरबादियोँ मे वो अक़्सर मेरा नाम लिया करते हैं,
दरअसल वाक़्या ए इश्क़ को जो दर्दनाक अंजाम दिया करते हैं,
केहते हैं वो कि रोते हैं रात भर याद मे मेरी,
मेरे दर्द मे गिरे अस्क़ों के जो जाम पिया करते हैं.

Sunday, January 24, 2016

हमे नही चाहिये थी शोहरत मोहब्बत मे तुने बेवफ़ाई कर के मशहूर कर दिया,
हर ज़ुल्म ओ सितम मंज़ूर था हमे तेरा फिर क्युँ बेवफ़ा केह के हमे दूर कर दिया.

Saturday, January 23, 2016

उसे चाँद न कहुँ तो और क्या कहुँ,
जिसने मेरा रौशन आफ़ताब डूबा दिया.

Friday, January 22, 2016

ग़म इतना है दिल मे कि मुस्कुराया जाता नही,
एक बार जो टूट के बिखरे तो फिर दिल लगाया जाता नही,
कुछ याद धूँधली ही सही दिल मे है उसकी,
चाह कर भी उस बेवफ़ा को भूलाया जाता नही.

Thursday, January 21, 2016

कितना भूलाना चाहा हम ने लेकिन वो अक़्सर आया करते हैं,
सताते थे कभी वो हक़ीक़त बन कर अब यादों मे भी सताया करते हैं.

Wednesday, January 20, 2016

युं दिल मे न उतरा करो किसी के धड़कन बन कर,
कि अक़्सर साँसों मे रुकावट सी पैदा हो जाती है.

Tuesday, January 19, 2016


दिल औरों का तोड़ना बडा ही आसान नज़र आता है,
हर तरफ़ जनाज़ा ए मोहब्बत का सामान नज़र आता है,
क़त्ल ए आम जो हुआ है इश्क़ का बेवफाई के इस दौर मे,
कि अब तो हर किसी के दिल मे क़ब्रिस्तान नज़र आता है.

Monday, January 18, 2016

तेरे दिये ज़ख्मों से टूटे दिल को हम ने सिना सिख लिया,
तेरे हर ज़ुल्म ओ सितम को मै की तरह पीना सिख लिया,
लगा के कभी बुझा दी जो तुने शमा इश्क़ की ऐ ज़ालिम,
कि फिर हम ने भी तन्हाइयों के अन्धेरों मे जीना सिख लिया.

Sunday, January 17, 2016

केहते हैं वो कि सोए नही हैं रात भर याद मे हमारी,
निगाहों मे न तलब है दीद की और न क़तरा नींद का.

Saturday, January 16, 2016

हमे जगाकर रातों मे न वो बेफिकर सोते तो बात कुछ और थी,
जुदा हो कर उनसे न तन्हाइयों मे हम रोते तो बात कुछ और थी,
माना तो था हम ने उन्हे अपना ऐ जुल्फिकार,
अफ़सोस वो हमारे होते तो बात कुछ और थी.

Friday, January 15, 2016

बेह जाऊँगा उनके अस्क़ों मे मैं वो अपनी भीगी पलकों मे मुझे ढूँढते रेह जाएँगे,
दफ़न हो जाऊँगा इश्क़ की क़ैद मे मैं वो अपने दिल की सलाखों मे मुझे ढूँढते रेह जाएँगे,
जलाएँगे ज़रूर वो हर खत मेरा जिनके हर लफ्ज़ मे मेरा एहसास मौजूद है,
हो जाएगा राख इक दिन ये जुल्फिकार भी वो बेखबरों की तरह मुझे हरफों मे ढूँढते रेह जाएँगे.

Thursday, January 14, 2016

हमारे खयालों मे तु आना छोड़ दे,
युं झूठी मोहब्बत मे फ़साना छोड़ दे,
ग़र देने ही हैं हमे आँसु ऐ ज़ालिम,
तो तु भी अब से मुस्कुराना छोड़ दे.

Wednesday, January 13, 2016

रुसवा हुआ जो वो हम से कभी हम ने मुस्कुराना छोड़ दिया,
बेह न जाए वो अस्कों मे कहीं हम ने तन्हाइयों मे आँसु बहाना छोड़ दिया,
वो बेवफ़ा था मगर हम ने नही सिखा सबक़ बेवफाई का हर्गिज़,
दिल मे बसा के उसकी यादों को अब हम ने दिल लगाना छोड़ दिया.

Tuesday, January 12, 2016

ज़हन मे बुनते खयालों को उधेड़ गया कोई,
आज फिर नज़रें मिला कर दिल के तार छेड़ गया कोई.

Monday, January 11, 2016

ज़माने भर की रुसवाई मिली,
दुनिया की भीड़ मे भी तन्हाई मिली,
रो रहा है जुल्फिकार अपनी क़िस्मत पे आज,
मोहब्बत भी की तो बेवफ़ाई मिली.

Sunday, January 10, 2016

इश्क़ के समन्दर मे उतर के देखा,
अपने खालीपन को तुझ से भर के देखा,
धूँधली सी हो गइ है तेरी तस्वीर भी अब तो,
हम ने बार बार दिल के आइने को साफ़ कर के देखा.

Saturday, January 9, 2016

सफ़र इश्क़ का मुक़म्मल न हो पाया,
मैं उस से जुदा हो कर रात भर न सो पाया,
अस्क़ भी खुश्क़ हो गए मेरे दर्द की तपिश मे,
मैं चाह कर भी अपने हाल पर न रो पाया.

Friday, January 8, 2016

आज भी तेरे लौट आने की आस बाकी है,
मेरे दिल मे अब तक तेरा एहसास बाकी है,
युं तो ज़िंदा हो कर भी ज़िंदा नही हुं मैं तेरे बग़ैर,
पर अब भी मेरे इश्क़ मे कुछ साँस बाकी है.

Thursday, January 7, 2016

अस्क़ों मे छुपा के मैं ने अपने दिल का हाल रखा है,
आज भी ज़हन मे तेरा खयाल रखा है,
जलाया होगा शायद तुने हर खत मेरा,
मैं ने तो आज भी तेरा वो दिल सम्भाल रखा है.

Wednesday, January 6, 2016

तेरे दिल के रास्ते बंजर निकले,
मीठी बातों की आड़ मे खंजर निकले,
हम समझते रहे जिन्हे सैलाब ए इश्क़ आज तक,
दरअसल वो बेवफाई के समन्दर निकले.

Tuesday, January 5, 2016

वो मौत भी ग़वारी है मुझे जो आए भी तो आग़ोश मे तेरी,
तेरे आगे क्या वजूद है मेरा तु है तो क़ायनात ज़िंदा है मेरी.

Monday, January 4, 2016

किसी ने पुछा मुझ से कि दर्द ए दिल की दवा कहाँ मिलेगी,
मेरी निगाहें ज़ानिब ए मैखाना हो गईं.

Sunday, January 3, 2016

क़ुरेद ना ज़ख्मों को मेरे उन्हे राज़ रेहने दे,
दर्द तो होगा भूलाने मे मगर ये दर्द सेहने दे,
बसाई थी तस्वीरें कइ उस बेवफा की इन निगाहों मे,
ऐ नज़र आज उन तस्वीरों को अस्क़ों मे बेहने दे.

Saturday, January 2, 2016

जो यादों से कभी खत्म न हो ऐसा क़िस्सा है दोस्ती,
मेरी ज़िंदगी अधूरी है जिसके बिना वो हिस्सा है दोस्ती,
देखे हैं कइ रिश्ते वफ़ा की परत मे लिपटे हुए,
जो पानी सा साफ़ हो ऐसा रिश्ता है दोस्ती.

Friday, January 1, 2016

रोते हुए को हसाने वाले देखे हैं,
ग़ैरों को भी दिल मे बसाने वाले देखे हैं,
खुदगर्ज़ भी कुछ युं मिले हैं हमे राहे मोहब्बत मे,
कि खुदगर्ज़ी के लिये दिल लगाने वाले देखे हैं.