Search Any Post From This Blog

Tuesday, August 7, 2018

काग़ज़ी इश्क़

इश्क़ काग़ज़ पर उतर गया है इस दीवाने से
मोहब्बत छिपती कहाँ है छिपाने से
ये तो बारिश है भीगा कर रहेगी
हमें भी मतलब है भीग जाने से

Wednesday, May 9, 2018

दिल का रौन्दना

कदमों में दिल बिछाएन्गे ये वादा जो कर लिया
उन्हे चीज़ों को रौन्दने की आदत सी हो गई

Saturday, April 28, 2018

मेरे हिस्से की शाम

मेरे वजूद का मुझ में ज़रा मक़ाम रेहने दो
खामोशियों में रवाँ दर्द का अंजाम रेहने दो
न मिली जो मेहफ़िलें तो क्या करता मैं ऐ जुल्फी
मेरे हिस्से वो अंधेरी तन्हा शाम रेहने दो

Wednesday, March 7, 2018

ग़लतियां

मोहब्बतके फ़सानों में इक मेरा फ़साना ग़लत निकला
जहाँ बसती थी ज़िंदगी मेरी वो आशियाना ग़लत निकला
बेहिसाब दिल्लगीके जो उनके सारे क़िस्से थे सही हैं मगर
मेरा तो बस ऐ जुल्फी सिर्फ़ उनसे दिल लगाना ग़लत निकला

Monday, February 12, 2018

बेवफाकी मेहफिल

शिरकत नही मुनासिब मेहफिल मे तेरी
कि अब तो सारे लब बेवफाईकी ज़ुबां बोलते हैं

Friday, February 2, 2018

अंदाज़ ए बेबसी

दास्तान ए मोहब्बतका अल्फाज़ हो जाऊँ
तेरी बेबसी मे जीनेका अंदाज़ हो जाऊँ
हर मुस्किल मे तु जुल्फीको अपने पास पाएगा
मुमकिन नही मैं तुझसे युं नाराज़ हो जाऊँ

Wednesday, January 10, 2018

कागज़ पे दर्द

तन्हा रातों मे खुश्कियोंको सवारा करते हैं
मोहब्बत मे बेताब दिलको यादोंका सहारा करते हैं
ज़िक्र न तेरा न तेरी बेवफ़ाईका शामिल बयान होता है
हम तो बस अपने दर्दको कागज़ पे उतारा करते हैं