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Sunday, December 10, 2017

तमाशा ए मोहब्बत

मेहफ़िल मे तेरी मोहब्बत का तमाशा ज़रूर हुँ
तुझे ख़ोने के बाद ख़ुद से तहाशा ज़रूर हुँ
न सोचना कि तिस्नग़ी ए बेवफ़ाई है मुझे
हा मग़र तेरी ना-उम्मीद वफ़ाओं का प्यासा ज़रूर हुँ

Saturday, October 28, 2017

तन्हा रात

क़िस्से बहुत हैं मेरी तन्हाई के ऐ जुल्फी
अभी तो पुरी रात बाकी है सुनने सुनाने को

Thursday, October 19, 2017

ख़ुदगर्ज़ कारवां

बडा ख़ुदगर्ज़ सा था वो धड़क़नों का कारवां
जब तक मोहब्बत साथ थी वो साथ निभाता गया

Sunday, October 15, 2017

मोहब्बत ने मोहब्बत को आज़माया

मोहब्बत ने मोहब्बत को आज़माया कुछ इस क़दर
शोर ए दीवानग़ी पर तन्हाई का क़हर ढाया कुछ इस क़दर
धड़क़नें भी रूक सी गई हैं उसके चले जाने से
उसे हम ने था दिल मे अपने बसाया कुछ इस क़दर

Sunday, October 8, 2017

आज़माइश वजूद की


मेरे वजूद की आज़माइश है उन्हे शायद
वो उनका मुँह मोडना मेरी जान ले लेता है

Tuesday, August 1, 2017

मोहब्बत की झूठी कहानी (दोबारा)

मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोए
कहानी पे रोए
मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोए
बडी चोट ख़ाई जवानी पे रोए
जवानी पे रोए
मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोए

मोहब्बत अधूरी ही रेह गई हमारी
न जानी कभी तूने दिल ए बेक़रारी
तुझ ही से जो थी दिल्लगानी पे रोए रोए
मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोए
बडी चोट ख़ाई जवानी पे रोए
जवानी पे रोए
मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोए

हमको ज़रूरी था तेरा मुस्कुराना
तुझको ज़रूरी इक हमे आज़माना
ज़रूरत तेरी इत्मीनानी पे रोए रोए
मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोए
बडी चोट ख़ाई जवानी पे रोए
जवानी पे रोए
मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोए

तुझको मोहब्बत का खुदा था बनाया
क्युँ तूने ना हमको कभी अपनाया
तेरी बेरुखी बेधियानी पे रोए रोए
मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोए
बडी चोट ख़ाई जवानी पे रोए
जवानी पे रोए
मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोए
कहानी पे रोए

Friday, July 7, 2017

नासाज़ क़मर

ऐ क़मर कि तु नासाज़ क्युँ है बता मुझको
क्या तुने भी मेरे मेहबूब का दीदार कर लिया

Wednesday, May 10, 2017

सदा दिल की

न वो आते हैं कि आख़ों को ईन्तज़ार है
न वो आते हैं कि आख़ों को ईन्तज़ार है
सदाएँ दिल से आती हैं हमे बस उनसे प्यार है
न वो आते हैं कि आख़ों को ईन्तज़ार है
सदाएँ दिल से आती हैं हमे बस उनसे प्यार है

मेरी हर साँस मे ख़ुशबू भी उनकी भर ही जाती है
मैं ग़रदिश का सितारा हुं वो भीड मे जगमगाती है
मेरी हर साँस मे ख़ुशबू भी उनकी भर ही जाती है
मैं ग़रदिश का सितारा हुं वो भीड मे जगमगाती है
तसव्वुर मे है
तसव्वुर मे है मेरा दिल दीद को बेक़रार है
तसव्वुर मे है मेरा दिल दीद को बेक़रार है
सदाएँ दिल से आती हैं हमे बस उनसे प्यार है

ये चेहरे से सनम तेरी तो बस मासुमियत झलके
शरारत है निग़ाहों की झुका रखी हैं जो पलकें
ये चेहरे से सनम तेरी तो बस मासुमियत झलके
शरारत है निग़ाहों की झुका रखी हैं जो पलकें
तेरे नज़र ए क़रम के
तेरे नज़र ए क़रम के ज़माने से तलबग़ार हैं
तेरे नज़र ए क़रम के ज़माने से तलबग़ार हैं
सदाएँ दिल से आती हैं हमे बस उनसे प्यार है

मैं जब फ़ुरसत बसर कभी तेरे ख़्वाबों से ग़ुज़रता हुं
वो ख़ुबसूरती तेरी ग़ज़ल की तरहा पढता हुं
मैं जब फ़ुरसत बसर कभी तेरे ख़्वाबों से ग़ुज़रता हुं
वो ख़ुबसूरती तेरी ग़ज़ल की तरहा पढता हुं
तेरी बारीक़ियों को
तेरी बारीक़ियों को बयां करता जुल्फीकार है
तेरी बारीक़ियों को बयां करता जुल्फीकार है
सदाएँ दिल से आती हैं हमे बस उनसे प्यार है

न वो आते हैं कि आख़ों को ईन्तज़ार है
सदाएँ दिल से आती हैं हमे बस उनसे प्यार है

Saturday, April 29, 2017

मोहब्बत की मेहफ़िल

कभी दिल मे मेरे तु झाँका तो कर
मोहब्बत की मेहफ़िल सजाई है
कभी दिल मे मेरे तु झाँका तो कर
मोहब्बत की मेहफ़िल सजाई है
तुझ ही से तो मेहफ़िल ये रौशन रहे
कि शमा भी तो तेरी जलाई है
कभी दिल मे मेरे तु झाँका तो कर
मोहब्बत की मेहफ़िल सजाई है

ख़ुबसूरत बनाया तुझे इस क़दर
कि आसमां के सितारों को ग़ुमराह किया
तुझे देखकर वो सोच मे पड गए
कि मुक़म्मल ये चाँद किसने अग़वा किया
ये ज़ुल्फ़ों कि काली घटाएं जो हैं
इन्ही ने क़हर दिल पे ढाई है
तुझ ही से तो मेहफ़िल ये रौशन रहे
कि शमा भी तो तेरी जलाई है
कभी दिल मे मेरे तु झाँका तो कर
मोहब्बत की मेहफ़िल सजाई है

ये हुस्न तुम्हारा ग़ज़ब ढा रहा
ग़ुज़रता नही वक़्त अब ग़ुज़ारे हुए
जो पर्दानशीं तुम कभी हो गए
तो बेपर्दा नज़र के नज़ारे हुए
इन क़ातिल तुम्हारी निग़ाहों ने ही
आग ईश्क़ कि दिल मे लगाई है
तुझ ही से तो मेहफ़िल ये रौशन रहे
कि शमा भी तो तेरी जलाई है
कभी दिल मे मेरे तु झाँका तो कर
मोहब्बत की मेहफ़िल सजाई है

हम बैठे थे यारों की मेहफ़िल मे ही
ज़हन मे बस तेरे ख़यालात थे
युं बातों मे ज़िक़्र तेरा हो गया
फ़िर निग़ाहों मे सब के सवालात थे
अब जुल्फी की कोई तमन्ना नही
बस तुझे अपनी ख़्वाहिश बनाई है
तुझ ही से तो मेहफ़िल ये रौशन रहे
कि शमा भी तो तेरी जलाई है
कभी दिल मे मेरे तु झाँका तो कर
मोहब्बत की मेहफ़िल सजाई है

Saturday, April 22, 2017

दौलत ए जुल्फी

कोई चाँद समझ लेता है कोई आफ़ताब समझ लेता है
कोई अपनी निग़ाहों मे बसा ख़्वाब समझ लेता है
तु वो दौलत है बेशक़िमती ऐ हसीं
जिसे पा करके जुल्फी ख़ुद को नवाब समझ लेता है

Friday, March 31, 2017

मोहब्बत या ज़रूरत

धोखा नहीँ था उनका बस फ़ितरत बदल गई
चाहते थे मुझे मगर अब चाहत बदल गई
ज़रूरत को ही शायद मोहब्बत केहते हैं लोग
हम क्या करते जुल्फी जो उनकी ज़रूरत बदल गई

Sunday, March 12, 2017

औक़ात ए बयानगी

लफ़्ज़ों मे दिल के जज़्बात कहाँ से लाऊँ
मैं अपनी शायरी में वो बात कहाँ से लाऊँ
ग़ज़ल ए खुबसूरती हैं वो क़ायनात की लिखी हुई
बयां कर सकुँ उन्हे वो औक़ात कहाँ से लाऊँ

Saturday, February 25, 2017

इन्तहा मोहब्बत की

वो इन्तेज़ार ए यार करते रहे ताउम्र
हर आहट पे दिल बेक़रार करते रहे ताउम्र
इन्तहा ए मोहब्बत क्या बयाँ करूँ जुल्फी
इक़ तरफ़ा ही सही मग़र वो प्यार करते रहे ताउम्र

Saturday, February 4, 2017

कशमकश

बिखर जाऊँ या समेट लूँ खुद को
मोहब्बत बिखरने नही देती और दर्द सिमटने नही देता