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Saturday, October 28, 2017

तन्हा रात

क़िस्से बहुत हैं मेरी तन्हाई के ऐ जुल्फी
अभी तो पुरी रात बाकी है सुनने सुनाने को

Thursday, October 19, 2017

ख़ुदगर्ज़ कारवां

बडा ख़ुदगर्ज़ सा था वो धड़क़नों का कारवां
जब तक मोहब्बत साथ थी वो साथ निभाता गया

Sunday, October 15, 2017

मोहब्बत ने मोहब्बत को आज़माया

मोहब्बत ने मोहब्बत को आज़माया कुछ इस क़दर
शोर ए दीवानग़ी पर तन्हाई का क़हर ढाया कुछ इस क़दर
धड़क़नें भी रूक सी गई हैं उसके चले जाने से
उसे हम ने था दिल मे अपने बसाया कुछ इस क़दर

Sunday, October 8, 2017

आज़माइश वजूद की


मेरे वजूद की आज़माइश है उन्हे शायद
वो उनका मुँह मोडना मेरी जान ले लेता है