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Saturday, October 31, 2015

किसी को अपने दिल मे बसाना भी मोहब्बत है,
दूर हो कर क़रीब आना भी मोहब्बत है,
और सिर्फ मोहब्बत को दुनिया बना कर जीना नही होता,
कभी कभी अपनी दुनिया भूलाना भी मोहब्बत है.

Friday, October 30, 2015

मन के कोरे क़ागज़ पे लिख के अपना नाम फिर मिटाने को केहते हैं,
दिल मे बसा के अपनी याद फिर भूल जाने को केहते हैं,
उनके लिये तो शायद इश्क भी एक मज़ाक सा है ऐ जुल्फिकार,
जो दिल तोड़ के किसी और के साथ दिल लगाने को केहते हैं.

Thursday, October 29, 2015

हमसे जो दिल लगाए ऐसे दिलदार की तलाश थी,
हमे समझ सके जो ऐसे यार की तलाश थी,
उसने नही समझा इश्क हमारा ऐ जुल्फिकार,
अरे हमे तो सिर्फ सच्चे प्यार की तलाश थी.

Wednesday, October 28, 2015

हम भी किसी के रुलाए हुए हैं,
किसी की यादों के सताए हुए हैं,
लोगों को शायद अंदाज़ा नही हमारी गेहराई का,
हम अपने अंदर कइ राज़ दबाए हुए हैं.

Tuesday, October 27, 2015

वादा किया और निभाया भी नही,
दिल लगाया पर पास आया भी नही,
हमे तो हररोज़ तेरी यादें रुलाती हैं,
क्या मेरी यादों ने तुझे सताया भी नही.

Monday, October 26, 2015

तुझे साथ निभाना नही आता,
इश्क मे दिल लगाना नही आता,
तेरे लिये तो भूलाना आसान था,
मगर हमे किसी को भूलाना नही आता.

Sunday, October 25, 2015

काश तुने अपनी निगाहों से जाम न पिलाया होता,
तो शायद शराबी बनने का शौक़ मुझे न आया होता.

Saturday, October 24, 2015

सुलझा के उलझाना कोई तुमसे सिखे,
लोगों के दिल मे जगह बनाना कोई तुमसे सिखे,
अरे हमे तो आता है हुनर दिल लगाने का,
धड़कन बनकर दिल तोड़ जाना कोई तुमसे सिखे.

Friday, October 23, 2015

नज़रों का ही तो सारा क़ूसूर था,
दिल पास हो कर भी न जाने क्युँ दूर था,
हम भी चाहते थे तेरे दिल मे रेहना मगर,
ये दिल तुझे खो न दे इस डर से मजबूर था.

Thursday, October 22, 2015

तुझे अपनी ज़िंदगी बनाया था,
कभी हम ने भी अपना प्यार आज़माया था,
तुने तोडा जिसे एक दिल समझ कर,
उसी दिल मे हम ने तुझे बसाया था.

Wednesday, October 21, 2015

हम ने तो अपना मान लिया उन्हे उन्हों ने हमे अपना माना ही नही,
हमारे दिल का हाल समझने वाले ने हमारा प्यार जाना ही नही,
वो ढूँढते रहे मोहब्बत को शहर भर मे ऐ जुल्फिकार,
अफ़सोस उन्हों ने हमारी मोहब्बत को पेहचाना ही नही.

Tuesday, October 20, 2015

मुँह मोड़ना फितरत है उनकी,
दिल तोड़ना आदत है उनकी,
हम करते रहे वफ़ा की उम्मीद उनसे,
बाद मे जाना कि बेवफाइ शराफत है उनकी.

Monday, October 19, 2015

वो भूल गए हमे लेकिन हम उन्हे न भूला पाए,
उन्हे तो शायद याद भी नही शक़्ल हमारी लेकिन हमे तो हर चेहरे मे वो नज़र आए.

Sunday, October 18, 2015

ज़िंदगी तो अपनी हो कर भी बेगानी है,
जो तु नही तो ज़िंदगी एक अधूरी कहानी है,
साथ तेरा सुकून देता है दिल को,
मुझे तो सारी ज़िंदगी तेरे साथ बितानी है.

Saturday, October 17, 2015

तुझे तो हम बेमिशाल समझते थे काश तु भी हमे बेहतर समझती,
हम ने तेरे साथ हर सफ़र तय किया काश तु हमे हमसफ़र समझती.

Friday, October 16, 2015

समझते तो सब कुछ थे वो पर ऐतबार नही था हम पर,
हम तो उन्हे बेपनाह चाहते थे उन्हे प्यार नही था हम पर.

Thursday, October 15, 2015

अरे दिल होता तो दिल का हाल समझते,
काश तुम हमे भी बेमिशाल समझते,
हम ने तो चल दीं कइ चालें दिल की शतरंज मे,
काश तुम भी कभी हमारे दिल की चाल समझते.

Wednesday, October 14, 2015

साथ निभाना था साथ निभाया बहुत,
हम ने उस बेवफा से दिल लगाया बहुत,
आज वो रो रही होगी हमारे प्यार को,
कभी उस ने भी हमे रुलाया बहुत.

Tuesday, October 13, 2015

दिल कांच का हो या पत्थर का उन्हे सिर्फ तोड़ना आता है,
पेहले लगाते हैं दिल फ़िर मुँह मोड़ना आता है,
उन्हे तो ज़िंदगी भी चंद लम्हों की मेहसूस होती है,
जिन्हे बिच सफ़र मे साथ छोड़ना आता है.

Monday, October 12, 2015

दुनिया मेरी आबाद न होती तो दिल परिन्दों सा आज़ाद न होता,
गर चले न होते तीर नज़रों से तो शायद मैं बरबाद न होता.

Sunday, October 11, 2015

कभी हमारे दिल मे झांका होता तो युं हमारा दिल न तोड़ती,
पगली हम तो दिल मे तेरी तस्वीर बसाए फिरते थे.

Saturday, October 10, 2015

हमे गैर क्या मारेंगे हम तो अपनो के मारे हैं,
कभी हम ने भी किसी के लिये ज़मीं पर चाँद तारे उतारे हैं,
वो बात और हुई कि उसे मोहब्बत न थी हमसे,
पर हम आज भी ज़िंदा उसकी यादों के सहारे हैं.

Friday, October 9, 2015

कभी हम लड़खडाए थे इश्क मे आज शराब के नशे मे चूर गिरते हैं,
और एक वो हैं कि हमे दर्द ए दिल दे कर खुद मासूम बने फिरते हैं.

Thursday, October 8, 2015

युं न पिलाओ जाम आंखों से क्या मुझे शराबी बनाने का इरादा है,
जाम तो मैखानों मे भी है पर आप की आंखों मे नशा कुछ ज़्यादा है.

Wednesday, October 7, 2015

जब मोहब्बत थी तुझसे तब भी तु साथ थी और अब भी बाकी मुझ मे तेरा वजूद है,
दिल मे रेहती थी कभी आरज़ू बन कर पर अब भी तु मेरे अस्कों मे मौजूद है.

Tuesday, October 6, 2015

पेहले हसना सिखा के बाद मे रुलाया क्युँ,
जाना ही था गर दूर तो पास आया क्युँ,
ख्वाब दिखा के तोड़ने मे क्या मज़ा आता है तुझे,
जब तोड़ना ही था दिल मेरा तो फिर दिल लगाया क्युँ.

Monday, October 5, 2015

औरों से करती है बातें हंस कर तु हमे न युं तरसाया कर,
हम भी करना चाहते हैं ग़ुफ्तग़ु तुझसे चंद लफज़ों के लिये न तड़पाया कर,
तेरे इक दीदार के लिये हम तेरे घर के बाहर तेरा इंतज़ार करते थकते नही,
हमारे दीदार को ना सही किसी और ही बहाने से तु हमारी गली भी तो आया कर.

Sunday, October 4, 2015

तेरी झुकी नज़रों का इक़रार अच्छा लगता है,
तेरा शरमा के किया इज़हार अच्छा लगता है,
युं तो तेरी हर इक अदा है इश्क के क़ाबिल,
पर मुझे तेरा बेइंतहा प्यार अच्छा लगता है.

Saturday, October 3, 2015

ठोकर लगी जो रास्तों मे कभी तो राह चलना आ गया,
गुज़रे जो बेवफा की गली से तो गिर के सम्भलना आ गया,
लगी हैं इतनी चोटें चलके राहे मोहब्बत पर,
कि अब तो हर ज़ख्म ए यार पर मरहम मलना आ गया.

Friday, October 2, 2015

उसे देख कर मेरे बाग़ी दिल ने कुछ इस तरह बग़ावत की थी,
कि इन ग़ुस्ताख निगाहों ने भी उसकी जानिब हरक़त की थी,
मलाल तो रहेगा हर दम कि हम ने चाहा भी तो एक बेवफा को,
लेकिन केह सकेंगे कि कभी हम ने भी किसी से मोहब्बत की थी.

Thursday, October 1, 2015

हम ने जिसे माना था अपना रब वही हमसे जुदा हो गए,
हमे दर्द ए दिल दे कर वो खुद तलाश ए खुदा हो गए.