कुछ युं समेटा उसने बेवफ़ाई की दास्तान को
कि लिख दिया मेरे नाम इश्क़ के हर अंजाम को
डर था उसे कि कोई गवाह न हो जाए बेवफ़ाई का उसकी
उसने हर वो ख़त जला दिये मेरे कल शाम को
कि लिख दिया मेरे नाम इश्क़ के हर अंजाम को
डर था उसे कि कोई गवाह न हो जाए बेवफ़ाई का उसकी
उसने हर वो ख़त जला दिये मेरे कल शाम को
No comments:
Post a Comment