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Friday, March 31, 2017

मोहब्बत या ज़रूरत

धोखा नहीँ था उनका बस फ़ितरत बदल गई
चाहते थे मुझे मगर अब चाहत बदल गई
ज़रूरत को ही शायद मोहब्बत केहते हैं लोग
हम क्या करते जुल्फी जो उनकी ज़रूरत बदल गई

Sunday, March 12, 2017

औक़ात ए बयानगी

लफ़्ज़ों मे दिल के जज़्बात कहाँ से लाऊँ
मैं अपनी शायरी में वो बात कहाँ से लाऊँ
ग़ज़ल ए खुबसूरती हैं वो क़ायनात की लिखी हुई
बयां कर सकुँ उन्हे वो औक़ात कहाँ से लाऊँ