मेहफ़िल ए दिल
दिल - दर्द - मेहफ़िल
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Monday, September 19, 2016
नज़ारे की तलब
नज़ारा ए चाँद की तलब है ज़माने से ऐ जुल्फी
निकलते हैं घर से हर वक़्त वो पर्दे की आड़ में
Saturday, September 3, 2016
साथ
पाने को साथ हर मोड़ पर ठहर जाएगा
अक़्स मेरा तेरी यादों मे उतर जाएगा
नही रहेगा तु ख़ाली ख़ुद के लिये भी
मेरा है तु मुझ ही से भर जाएगा
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