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Monday, June 13, 2016

क़ुसूर ए बेवफ़ाई

ग़ुमनामी के मंज़र थे अब तक आज हम मशहूर हो गए
कि हम से कुछ खफ़ा खफ़ा हमारे दस्तूर हो गए
करती रही वो ज़ालिम हम से बेवफ़ाई हर पल
वो लम्हे बेवफ़ाईयत के जुल्फीकार सारे हमारे क़ुसूर हो गए

Thursday, June 9, 2016

जलते गवाह

कुछ युं समेटा उसने बेवफ़ाई की दास्तान को
कि लिख दिया मेरे नाम इश्क़ के हर अंजाम को
डर था उसे कि कोई गवाह न हो जाए बेवफ़ाई का उसकी
उसने हर वो ख़त जला दिये मेरे कल शाम को

Sunday, June 5, 2016

काम से बदनामी तक

वो अपने काम हमारे नाम कर गए
कि हमे बेवफ़ा बता कर बदनाम कर गए