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Sunday, March 12, 2017

औक़ात ए बयानगी

लफ़्ज़ों मे दिल के जज़्बात कहाँ से लाऊँ
मैं अपनी शायरी में वो बात कहाँ से लाऊँ
ग़ज़ल ए खुबसूरती हैं वो क़ायनात की लिखी हुई
बयां कर सकुँ उन्हे वो औक़ात कहाँ से लाऊँ

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