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Monday, March 28, 2016

दिल छोटा सा था मेरा और चाहने वाले कुछ ज़्यादा,
शायद यही वजह रही होगी मेरे दिल के टूट जाने की.

Thursday, March 24, 2016

रहूँगा मौजूद तेरी बातों मे,
याद आऊँगा ज़रूर तन्हा रातों मे,
भीगेंगी जब कभी पलकें तेरी,
बरस जाऊँगा मैं भी बरसातों मे.

Sunday, March 20, 2016

तुझे पा कर ऐ सनम दिल्लग़ी पा ली हम ने,
इश्क़ की शक़्ल मे तेरी बन्दग़ी पा ली हम ने,
जीना बेमाइने सा था अब तक शायद जुल्फ़ीकार का,
आज लगता है कि तुझ मे ज़िंदग़ी पा ली हम ने.

Friday, March 18, 2016

कइ सवाल थे मेरी तन्हाई के तुझ से ऐ बेवफ़ा,
कुछ खामोश रेह गए और कुछ अस्क़ों मे बेह गए.

Tuesday, March 8, 2016


इन खुश्बूओं मे कभी तेरा एहसास ढूँढा करते थे,
भीड़ की हर शक़्ल मे हम कोई खाश ढूँढा करते थे.
जो रब दिखता है इश्क़ वालों को अपने यार की शक़्ल मे,
हम तेरे इश्क़ मे उस को हो के बदहवाश ढूँढा करते थे.
तुझे देख कर ही तो हर पल दिल धड़कता था हमारा,
हम तो तुझ मे हर धड़कन हर साँस ढूँढा करते थे.
जुदा हुआ भी तु कुछ इस क़दर कि फिर मिल न पाया हमे,
हरदम तुझे हम अपने दिल के पास ढूँढा करते थे.
वो जो वादे किये थे तुने आया नही फिर निभाने कि खातिर,
जो पुरी की हो कभी हमारी हम वो आस ढूँढा करते थे.
तेरी मोहब्बत भरी बातों मे कोई सच्चाई तो होगी ऐ ज़ालिम,
हम तेरे हर झूठ को बारिक़ी से तराश ढूँढा करते थे.

Friday, March 4, 2016

मोहब्बत की राहों मे चलते चलते काँटों का आशियाना मिला,
हम समझते रहे जिसे अपना दरअसल वही बेगाना मिला.
हम ने अपना दिल दिया था उसे इस क़दर ऐतबार था उस पर,
उम्मीद ए वफ़ा थी जिस से उसी से दर्द का फ़साना मिला.
वो झूठे वादे थे जिसके मोहब्बत दिखावे की थी,
उस बेवफ़ा सनम का तो किसी और के साथ याराना मिला.
न कुछ पाना था और न इश्क़ से ज़्यादा कुछ चाहते थे,
माँगा जो इश्क़ तो बदले मे बेवफ़ाई का नज़राना मिला.
ढूँढते थे हम जिस मुजरिम को दुनिया की भीड़ मे,
उस क़ातिल ए इश्क़ का हमारी निगाहों मे ही ठिकाना मिला.
वो लाख कर ले कोशिश मगर हमे भूला न पाएगा,
याद रहेगा उसे कि बेन्तेहा चाहने वाला एक दीवाना मिला.