मोहब्बतके फ़सानों में इक मेरा फ़साना ग़लत निकला
जहाँ बसती थी ज़िंदगी मेरी वो आशियाना ग़लत निकला
बेहिसाब दिल्लगीके जो उनके सारे क़िस्से थे सही हैं मगर
मेरा तो बस ऐ जुल्फी सिर्फ़ उनसे दिल लगाना ग़लत निकला
जहाँ बसती थी ज़िंदगी मेरी वो आशियाना ग़लत निकला
बेहिसाब दिल्लगीके जो उनके सारे क़िस्से थे सही हैं मगर
मेरा तो बस ऐ जुल्फी सिर्फ़ उनसे दिल लगाना ग़लत निकला