मेहफ़िल ए दिल
दिल - दर्द - मेहफ़िल
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Saturday, January 16, 2016
हमे जगाकर रातों मे न वो बेफिकर सोते तो बात कुछ और थी,
जुदा हो कर उनसे न तन्हाइयों मे हम रोते तो बात कुछ और थी,
माना तो था हम ने उन्हे अपना ऐ जुल्फिकार,
अफ़सोस वो हमारे होते तो बात कुछ और थी.
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