किनारों से तो हर समन्दर खुशनुमा नज़र आता है,
गेहराईओं मे छिपे राज़ कौन जान पाता है.
बेफिक़री से जीते हैं वो जिन्हे मोहब्बत नही किसी से,
गैरों से दिल लगाने वाला ही अक़्सर चोट खाता है.
कोई लिखता है खत जज़्बातों वाले किसी की यादों मे खो कर,
कोई किसी के खत को सिर्फ क़ागज़ समझ के जलाता है.
किसी की वफ़ा है कि भूलने नही देती उसके प्यार को,
कोई बेवफाईयत मे डूब कर अपने प्यार को भूलाता है.
कोई देख नही पाता अपने यार की आंख मे क़तरा आँसु का,
कोई बडी ही बेदर्दी से अपने यार को रुलाता है.
जब देखता हुं किसी इश्क़ वाले को रोते अपने रब की खातिर,
तब सोचता हुं क्युँ कोई किसी को अपना रब बनाता है.
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