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Thursday, October 27, 2016

बेवफ़ाई का समन्दर

न क़स्ती थी न किनारा था
न साथ किसी अपने का सहारा था
डूब रहे थे हम जिसमे ऐ जुल्फी
वो समन्दर ही दरअसल हमारा था

Monday, October 24, 2016

बदलाव

जूनून ए इश्क़ मे मेरे कभी बदलाव न होता
ग़र दिल पे मेरे बेवफ़ाई का वो घाव न होता

Saturday, October 15, 2016

दर्द ए ग़ज़ल

लिख दूँ कोई ग़ज़ल कि दर्द ए दिल बयां कर दूँ
अंदाज़ ए शायरी में हर मुश्क़िल बयां कर दूँ
छिपाउँ किस तरहा क़िस्से तेरी बेवफ़ाई के
कि तुझे भी हर हर्फ़ मे शामिल बयां कर दूँ

Tuesday, October 11, 2016

ज़िक्र ए बेवफ़ाई

हो रही थी ज़िक्र ए बेवफ़ाई मेहफ़िल में
वो लफ़्ज़ों मे बयां करते रहे और हम अस्क़ों में

Saturday, October 8, 2016

उम्मीद ए मोहब्बत

केहते हैं कि मिलता है खुदा मोहब्बत करने वालों में
हमैं तो मोहब्बत भी न मिली हम पे मरने वालों में