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Saturday, October 15, 2016

दर्द ए ग़ज़ल

लिख दूँ कोई ग़ज़ल कि दर्द ए दिल बयां कर दूँ
अंदाज़ ए शायरी में हर मुश्क़िल बयां कर दूँ
छिपाउँ किस तरहा क़िस्से तेरी बेवफ़ाई के
कि तुझे भी हर हर्फ़ मे शामिल बयां कर दूँ

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