जहाँ ख़त्म होता हुं मैं वहाँ से तुम्हारी शुरुआत होती है
नही गुज़रता दिन तुम्हारे बिना न तुम बिन मेरी रात होती है
अब तो ख़ामोश नही रेहता दिल मेरा खामोशियों में ऐ सनम
कि मेहफ़िल ऐ तन्हाई मे भी हर पल तुम्हारी बात होती है
हर अस्क़ तेरा अपनी आंखों से बहा दुँगा
हर शाम तेरी सितारों से सज़ा दुँगा
न होने दुँगा कभी अन्धेरा तेरी ज़िंदगी में
रौशन करने को तेरी ज़िंदगी मैं अपना दिल भी जला दुँगा