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Saturday, May 21, 2016

रेत में सूरत तेरी

फिराईं जो ऊँगलियां कभी रेत पर हम ने तो वहाँ तुम्हारी सूरत बन गइ
कुछ युं बसाया तुम्हे दिल मे अपने कि तुम हर धड़कन की ज़रूरत बन गइ

Thursday, May 12, 2016

ख़त्म से शुरुआत

जहाँ ख़त्म होता हुं मैं वहाँ से तुम्हारी शुरुआत होती है
नही गुज़रता दिन तुम्हारे बिना न तुम बिन मेरी रात होती है
अब तो ख़ामोश नही रेहता दिल मेरा खामोशियों में ऐ सनम
कि मेहफ़िल ऐ तन्हाई मे भी हर पल तुम्हारी बात होती है

Sunday, May 8, 2016

जलते दिल से रौशन ज़िंदगी

हर अस्क़ तेरा अपनी आंखों से बहा दुँगा
हर शाम तेरी सितारों से सज़ा दुँगा
न होने दुँगा कभी अन्धेरा तेरी ज़िंदगी में
रौशन करने को तेरी ज़िंदगी मैं अपना दिल भी जला दुँगा