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Sunday, May 26, 2019

प्यास

वो आज़ाद पंछी, मैं ठेहरा हुआ पानी
दो घूंट भर ही थी हमारी कहानी

Monday, April 15, 2019

अधूरे हम

ज़ख्म भर गए, मुक़म्मल हम न हो सके
मर्ज़ ए ज़िंदगी पे मरहम न हो सके
दिल रोया भी तो तन्हाई में इस लिए
कि ज़माने को ग़म का वहम न हो सके

Tuesday, April 9, 2019

सफ़र

नहीं मंज़िल में हुनर कि मुसाफ़िर तराश दे
ये रास्ते ही कसीदाकार लगते हैं

Sunday, March 10, 2019

खामोशी

मग़रूरियत गवार ना मसरूफ़ हुँ मैं
शायद तन्हा ही ज़माने से मेहफ़ूज़ हुँ मैं
अंदाज़ा नहीं जिन्हे मेरे दिल की गेहराइयों का
वो केहते हैं तकबुर में अभी चुप हुँ मैं

Tuesday, March 5, 2019

इशारे आँखों के

पढ़ता रहा बंद आँखों से उसे खुली आँखों से बयां करता रहा
बहाया भी आँखों से कभी तो कभी खुश्क आँखों में भरता रहा