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Sunday, February 28, 2016

हर वो याद के साथ तेरी आंखों को भर जाऊँगा,
दिल मे तेरे कहीं धड़कन बनकर ठहर जाऊँगा,
भूलने न दूँगा तुझे हर क़िस्सा वो दोस्ती का ऐ दोस्त,
दोस्त हुं मैं कोई याद नही जो ज़हन से उतर जाऊँगा.

Saturday, February 27, 2016

हर दर्द की इन्तहा से गुज़र चुका हुं मैं,
दलदल ए बेवफाई मे उतर चुका हुं मैं,
केहते हैं लोग कि खाली नही दिल मेरा मोहब्बत के लिये,
वो क्या जाने कि कितने ज़ख्मों से भर चुका हुं मैं.

Friday, February 26, 2016


किनारों से तो हर समन्दर खुशनुमा नज़र आता है,
गेहराईओं मे छिपे राज़ कौन जान पाता है.
बेफिक़री से जीते हैं वो जिन्हे मोहब्बत नही किसी से,
गैरों से दिल लगाने वाला ही अक़्सर चोट खाता है.
कोई लिखता है खत जज़्बातों वाले किसी की यादों मे खो कर,
कोई किसी के खत को सिर्फ क़ागज़ समझ के जलाता है.
किसी की वफ़ा है कि भूलने नही देती उसके प्यार को,
कोई बेवफाईयत मे डूब कर अपने प्यार को भूलाता है.
कोई देख नही पाता अपने यार की आंख मे क़तरा आँसु का,
कोई बडी ही बेदर्दी से अपने यार को रुलाता है.
जब देखता हुं किसी इश्क़ वाले को रोते अपने रब की खातिर,
तब सोचता हुं क्युँ कोई किसी को अपना रब बनाता है.

Tuesday, February 23, 2016

वो आए मेहफिल मे तो इश्क़ का बहाना हो गया,
उनका मेरी निगाहों मे ही कहीं ठिकाना हो गया.
संजिदगी छाई हुई थी मेहफिल ए दिल मे अब तक,
उनके आते ही हर लफ्ज़ शायराना हो गया.
हुस्न की मलिका हैं वो उनकी नज़ाक़त तो देखो,
उनकी इक हसी से सारा आलम आशिक़ाना हो गया.
उन्हो ने देखा जो मुझे युं नज़रें उठा कर,
मेरे दिल पे जैसे वार कोई क़ातिलाना हो गया.
मेरे सीने मे जो दिल धड़क रहा है बार बार,
अब वो भी मेरा न रहा बेगाना हो गया.
अब नही हैं लफ्ज़ मेरे पास उनकी तारीफ़ की खातिर,
ऐ जुल्फ़ीकार मेरा तो हर शेर उनका दीवाना हो गया.
मैं लिखता चला गया याद मे उनकी कुछ इस क़दर,
कि मुझे मालूम ही नही कब ये एक फ़साना हो गया.
कोई बताए उन्हे हमारे दिल मे जो शोर ए मोहब्बत उठा है,
उन्हे शायद मालूम नही कि हमे खामोश रहे ज़माना हो गया.
वो एक मुलाक़ात अधूरी ही रेह गई न चाहते हुए भी,
अब हररोज़ उनका मेरे दिल मे आना जाना हो गया.

Wednesday, February 17, 2016


एक खेल बन के रेह गया हुं मैं ऐ जुल्फ़ीकार,
कभी ज़िंदगी खेल जाती है तो कभी लोग.

Sunday, February 14, 2016


उलझ के रेह गया हुं दिल के टुकडों मे मैं,
समझ नही आ रहा दिल टूटा है या तोडा गया है.

Saturday, February 13, 2016

मोहब्बत मे दर्द ए दिल का सेह जाना ही सही है,
तेरी याद मे अस्क़ों का बेह जाना ही सही है,
तु ही तु बसी थी अब तक मुझ मे ऐ बेवफ़ा,
मुझ मे अब मेरा कुछ रेह जाना ही सही है.

Friday, February 12, 2016


क्या बहाऊँ मैं अस्क़ों को तेरी याद मे ऐ ज़ालिम,
अस्क़ हैं कि तेरी यादों से वफ़ा कर बैठे हैं.