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Sunday, March 10, 2019

खामोशी

मग़रूरियत गवार ना मसरूफ़ हुँ मैं
शायद तन्हा ही ज़माने से मेहफ़ूज़ हुँ मैं
अंदाज़ा नहीं जिन्हे मेरे दिल की गेहराइयों का
वो केहते हैं तकबुर में अभी चुप हुँ मैं

Tuesday, March 5, 2019

इशारे आँखों के

पढ़ता रहा बंद आँखों से उसे खुली आँखों से बयां करता रहा
बहाया भी आँखों से कभी तो कभी खुश्क आँखों में भरता रहा