मेहफ़िल ए दिल
दिल - दर्द - मेहफ़िल
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Friday, July 31, 2015
तु साथ हो तो हर लम्हा जीते हैं,
ज़िंदगी के हर ग़म हस के पीते हैं.
Thursday, July 30, 2015
तुम लाख कोशिश कर लो हमे भूलाने की,
हम हर मुमकिन कोशिश करेंगे तुम्हे याद आने की.
Monday, July 27, 2015
दर पे तेरे खडे हैं तु दरवाज़ा तो खोल,
कब तक रूठी रहेगी युं मुझसे अब तो कुछ बोल.
Sunday, July 26, 2015
ग़म कितना भी छुपाउँ मैं उनसे मेरा ग़म वो जान लेते हैं,
एक दोस्त ही तो होते हैं जो भीड़ मे भी हमे पेहचान लेते हैं.
Saturday, July 25, 2015
गैरों से क्या शिक़वा करूँ जब अपने ही दगाबाज़ निकले,
भोली भाली सूरत थी जिनकी वही चालसाज़ निकले.
Friday, July 24, 2015
दोस्ती को भूलाना कितना आसान था उनके लिये कि वो किसी और की फिकर करने लगे,
पेहले तो जान छिड़कते थे दोस्तों पे अब वो किसी और पे मरने लगे.
Thursday, July 23, 2015
ज़ख्म बेवफाई का है ऐसा जो कभी भर न सके,
हम तेरे सिवा किसी और से प्यार कर न सके.
Wednesday, July 22, 2015
दर ए इश्क पे हररोज तेरा सजदा करता हुं,
जीता भी हुं तेरे लिये और तेरे लिये ही मरता हुं.
Tuesday, July 21, 2015
किसे दिखाऊं दिल चीर के कि कितना दर्द मेरे दिल मे है,
आज भी एक बेवफा की याद दिल की मेहफिल मे है.
Monday, July 20, 2015
तेरी तक़दीर के हर इक पन्ने पे मेरी तक़दीर मिलेगी,
दिल चीर के देख मेरा तुझे तेरी तस्वीर मिलेगी.
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