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Saturday, December 31, 2016

यादों मे तस्वीर मेरी

जुड़ जाऊँगा तुझ से तेरी तक़दीर बन कर
रहुँगा मोहब्बत का मुन्तज़िर बन कर
न सोचना कि गुज़रा वक़्त हुं मैं भूल जाओगे
यादें भी आएँगी मेरी तस्वीर बन कर

Saturday, December 17, 2016

नज़रअंदाज़ी

मैं हर मंज़र मे तलाशता हुं मौजूदगी जिनकी
वो देख कर भी अक़्सर मुझे अनदेखा कर देते हैं