वो आए मेहफिल मे तो इश्क़ का बहाना हो गया,
उनका मेरी निगाहों मे ही कहीं ठिकाना हो गया.
संजिदगी छाई हुई थी मेहफिल ए दिल मे अब तक,
उनके आते ही हर लफ्ज़ शायराना हो गया.
हुस्न की मलिका हैं वो उनकी नज़ाक़त तो देखो,
उनकी इक हसी से सारा आलम आशिक़ाना हो गया.
उन्हो ने देखा जो मुझे युं नज़रें उठा कर,
मेरे दिल पे जैसे वार कोई क़ातिलाना हो गया.
मेरे सीने मे जो दिल धड़क रहा है बार बार,
अब वो भी मेरा न रहा बेगाना हो गया.
अब नही हैं लफ्ज़ मेरे पास उनकी तारीफ़ की खातिर,
ऐ जुल्फ़ीकार मेरा तो हर शेर उनका दीवाना हो गया.
मैं लिखता चला गया याद मे उनकी कुछ इस क़दर,
कि मुझे मालूम ही नही कब ये एक फ़साना हो गया.
कोई बताए उन्हे हमारे दिल मे जो शोर ए मोहब्बत उठा है,
उन्हे शायद मालूम नही कि हमे खामोश रहे ज़माना हो गया.
वो एक मुलाक़ात अधूरी ही रेह गई न चाहते हुए भी,
अब हररोज़ उनका मेरे दिल मे आना जाना हो गया.
No comments:
Post a Comment