Search Any Post From This Blog

Saturday, September 19, 2015

मत बन किसी का रब मत खेल किसी के जज़्बातों से,
मत तोड़ किसी का दिल पेहले लुभा के मीठी बातों से,
आज हम पे क्या गुज़र रही है ये तु नही जानता शायद,
पर याद रखना कभी तु भी गुज़रेगा इन हालातों से.

No comments:

Post a Comment