मेहफ़िल ए दिल
दिल - दर्द - मेहफ़िल
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Thursday, September 10, 2015
इश्क मेरा क़ूबुल न था उन्हे वरना मैं भी आशिक़ पुराना था,
दम कितना है मेरी मोहब्बत मे इसका गवाह तो सारा ज़माना था,
मुझे खो कर वो बेखबर ढूँढ रहे हैं मुझे आज मेरे ही शहर मे,
उन्हे शायद याद नही कि कभी मेरा भी उनकी गलियों मे आना जाना था.
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