कभी हम ने भी बिछाए थे किसी के राहों मे फूल और उसने हमे काँटों पे सुला दिया,
हम बिना रोए सेहते रहे हर ग़म ज़िंदगी के और उसने दर्द ए दिल दे कर हमे रुला दिया,
जो कल तक हमे अपना सब कुछ मानते थे आज वो हम से मिलते हैं गैरों की तरह,
हम न भूला सके उसकी वो बेरुखी पर उसने पल भर मे ही हमारा प्यार भूला दिया.
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