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Thursday, September 17, 2015

कभी हम ने भी बिछाए थे किसी के राहों मे फूल और उसने हमे काँटों पे सुला दिया,
हम बिना रोए सेहते रहे हर ग़म ज़िंदगी के और उसने दर्द ए दिल दे कर हमे रुला दिया,
जो कल तक हमे अपना सब कुछ मानते थे आज वो हम से मिलते हैं गैरों की तरह,
हम न भूला सके उसकी वो बेरुखी पर उसने पल भर मे ही हमारा प्यार भूला दिया.

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