मेहफ़िल ए दिल
दिल - दर्द - मेहफ़िल
Search Any Post From This Blog
Saturday, December 5, 2015
भूल मेरी ही थी जो अपनी कमी को उससे पुरा करना चाहा,
ज़िंदगी से मिले ज़ख्मों को हम ने भरना चाहा,
हम उल्फत मे कुछ समझ ही न पाए थे,
जो एक पत्थर दिल मे उतरना चाहा.
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment