Search Any Post From This Blog

Wednesday, December 23, 2015

इन खुश्क निगाहों मे आज ये नमी कैसी है,
सब कुछ पा कर भी न जाने ये कमी कैसी है,
हम उसकी ख्वाहिश करतें हैं जो हमारा ही नही,
फिर उसे पाने की ये खुशफेहमी कैसी है.

No comments:

Post a Comment