मेहफ़िल ए दिल
दिल - दर्द - मेहफ़िल
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Monday, November 30, 2015
कभी खुश होते थे हम जिसे देख कर उसने आज रुलाया बहुत है,
जिसे केहते थे हम ज़िंदगी अपनी उसने मौत के क़रीब लाया बहुत है,
परखना नही चाहा कभी उसे ये ऐतबार था हमारा,
और उस बेवफा ने तो हमे आज़माया बहुत है.
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