मेहफ़िल ए दिल
दिल - दर्द - मेहफ़िल
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Friday, November 27, 2015
हमे तो भूला दिया हमारी यादों को कैसे भूलाओगी,
हमे रुला कर मन नही भरा जो हमारी यादों को भी रुलाओगी,
कितनी मुस्किल से हासिल होती है सच्ची मोहब्बत इस बेदर्दी दुनिया मे,
ये मोहब्बत मे ठोकर खा कर तुम खुद जान जाओगी.
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