मेहफ़िल ए दिल
दिल - दर्द - मेहफ़िल
Search Any Post From This Blog
Saturday, November 28, 2015
तेरी ज़ुल्फों की काली बदलियों मे कहीं खो जाने को जी चाहता है,
तेरी गोद मे सर रख कर फिर सो जाने को जी चाहता है,
एक बार जो डूबे तेरी इन झील सी निगाहों मे ऐ सनम,
तो फिर कभी इन से बाहर न जाने को जी चाहता है.
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment