Search Any Post From This Blog

Sunday, March 10, 2019

खामोशी

मग़रूरियत गवार ना मसरूफ़ हुँ मैं
शायद तन्हा ही ज़माने से मेहफ़ूज़ हुँ मैं
अंदाज़ा नहीं जिन्हे मेरे दिल की गेहराइयों का
वो केहते हैं तकबुर में अभी चुप हुँ मैं

No comments:

Post a Comment