मग़रूरियत गवार ना मसरूफ़ हुँ मैं
शायद तन्हा ही ज़माने से मेहफ़ूज़ हुँ मैं
अंदाज़ा नहीं जिन्हे मेरे दिल की गेहराइयों का
वो केहते हैं तकबुर में अभी चुप हुँ मैं
शायद तन्हा ही ज़माने से मेहफ़ूज़ हुँ मैं
अंदाज़ा नहीं जिन्हे मेरे दिल की गेहराइयों का
वो केहते हैं तकबुर में अभी चुप हुँ मैं
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